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पद्मिनी : आख्यान, इतिहास, संस्कृति और जीवन मूल्य
पद्मिनी-रत्नसेन प्रकरण सदियों से लोक स्मृति में ‘मान्य सत्य’ की तरह रहा है। सोलहवीं से उन्नीसवीं सदी तक इस प्रकरण पर निरंतर कथा-काव्य रचनाएँ होती रही हैं और ये अपने चरित्र और प्रकृति में कुछ हद तक ‘इतिहास’ भी हैं। विडंबना यह है कि यह प्रकरण बीसवीं सदी के छठे-सातवें और इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में व्यापक चर्चा में तो रहा, लेकिन इसकी परख-पड़ताल में इस्लामी, फ़ारसी-अरबी स्रोतों की तुलना में इन रचनाओं का उपयोग नहीं के बराबर हुआ। अधिकांश आधुनिक इतिहासकारों ने इन देशज रचनाओं के बज

Madhav Hada
Sep 535 min read


The ‘Real’ Self of Meera
Mohammad Asim Siddiqui The Book Review | August 2026, volume 50, No 8 MEERA VS. MEERA: DEVOTED SAINT-POET OR DETERMINED QUEEN? (PACHRANG CHOLA PAHAR SAKHI RI) by By Madhav Hada. Translated from the original Hindi by Pradeep Trikha Vani Prakashan, 2023, 237 pp., INR ₹ 599.00 Meera vs. Meera: Devoted Saint-Poet or Determined Queen attempts to clear many misconceptions about the venerated sixteenth-century mystic poet, Meerabai. The subtitle of the English translation, very imag

Madhav Hada
Aug 198 min read


ऐसा ही है मेरा जीवन
चोखामेला के अभंगों का हिंदी भाव रूपांतर बनास जन । अगस्त-अटूबर्, 2026 चोखामेला (1260-1338 ई.) महाराष्ट्र के विख्यात वारकरी दलित संत-भक्त और कवि थे। उन्हें मराठी का पहला दलित कवि भी कहा जाता है। वर्तमान में, दलित पहचान के रूप में बहुधा प्रयुक्त होने वाले अभिवादन ‘जोहार’ का सबसे पहला प्रयोग चोखामेला के अभंगों में मिलता है। उनकी जोहार पर पूरी अभंग शृंखला है। चोखामेला की ख़ास बात यह है कि उन्होंने अपनी दलित चेतना को ही अपनी भक्ति चेतना में बदल दिया। उनके अभंगों में उनके दलित होने क

Madhav Hada
Aug 96 min read
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