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ऐसा ही है मेरा जीवन
चोखामेला के अभंगों का हिंदी भाव रूपांतर बनास जन । अगस्त-अटूबर्, 2026 चोखामेला (1260-1338 ई.) महाराष्ट्र के विख्यात वारकरी दलित संत-भक्त और कवि थे। उन्हें मराठी का पहला दलित कवि भी कहा जाता है। वर्तमान में, दलित पहचान के रूप में बहुधा प्रयुक्त होने वाले अभिवादन ‘जोहार’ का सबसे पहला प्रयोग चोखामेला के अभंगों में मिलता है। उनकी जोहार पर पूरी अभंग शृंखला है। चोखामेला की ख़ास बात यह है कि उन्होंने अपनी दलित चेतना को ही अपनी भक्ति चेतना में बदल दिया। उनके अभंगों में उनके दलित होने क

Madhav Hada
6 days ago6 min read


भक्ति के दिक्-काल और सरहदीकरण से आगे
यवनिका तिवारी । तद्भव- 52 वैदहि ओखद जाणै, पद्विनी : इतिहास और कथा-काव्य की जुगलबंदी और अब सद्य: प्रकाशित भक्ति अगाथ अनंत समेत अन्य बहुत-से मोरचों पर आलोचक माधव हाड़ा औपनिवेशिक ज्ञानकाण्ड को चुनौती देते दीखते हैं। भक्ति-साहित्य या भक्ति प्रधान चेतना भारतीय साहित्य के इतिहास की एक मुसलसल प्रकिया है पर पश्चिमी विद्वत्ता के दृष्टिदोष ने भक्ति-चेतना को यादृच्छिकता की हद तक कालबद्ध किया है और इस प्रकार भक्ति-साहित्य की देशजता, परम्पराजीविता, स्मृतिजीविता आदि बहुत-से ठेठ गुणों को झ
यवनिका तिवारी
May 2610 min read


यह वियोग का ही है शोक
रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941 ई.) भारतीय साहित्य का सबसे महत्त्वपूर्ण और चर्चित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक आदि सभी विधाओं में लिखा और संगीत और चित्रकला को भी समृद्ध किया। उनका विचारात्मक और आलोचनात्मक लेखन भी प्रचुर मात्रा में है। शांति निकेतन शिक्षा के क्षेत्र उनके नवाचार का साक्ष्य है। उन्होंने अपनी रचना, चिंतन, कर्म और असाधारण व्यक्तित्व से आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और आज भी वे कई लोगों के आदर्श हैं। उन्हें पश्चिम में पूर्व का एक महान् र

Madhav Hada
May 99 min read
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