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भारतीय भक्ति-चेतना : अंतःक्रियाएँ और रूपांतरण
नागरीप्रचारिणीपत्रिका । पुंनर्नवांक : 1 । 2026 भारतीय भक्ति-चेतना के विकास में इसमें होने वाली अंतःक्रियाओं का बहुत महत्त्व है। भारतीय भक्ति-चेतना की कोई प्रवृत्ति, धारा और रूप अपने आरंभ से लगाकर अपने उत्कर्ष तक एकरूप और एकरैखिक कभी नहीं रहे। इन अंतःक्रियाओं के कारण इसमें प्रतिरोध, समाहार, आत्मसातीकरण, समन्वय, एकीकरण जैसी प्रक्रियाएँ चलती रहीं। भक्ति-चेतना के विकास को समझने के लिए इन अंतःक्रियाओं और इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रेरकों की पहचान और समझ बहुत ज़रूरी है। अभी तक भा

Madhav Hada
Feb 2528 min read


इतिहास बोध का संवर्धन करनेवाली विलक्षण कृति । प्रो कृष्ण मोहन श्रीमाली
है तो चित्तौड़गढ़ और सब गढ़ैया । पर्यटकों और सैलानियों के लिए महान आकर्षण । लगभग बीस वर्षीय नवयुवक के रूप में मैं भी 1966 में वहाँ पहुंचा था...
KM SHRIMALI
Nov 1, 202325 min read
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