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भारतीय भक्ति-चेतना : अंतःक्रियाएँ और रूपांतरण
नागरीप्रचारिणीपत्रिका । पुंनर्नवांक : 1 । 2026 भारतीय भक्ति-चेतना के विकास में इसमें होने वाली अंतःक्रियाओं का बहुत महत्त्व है। भारतीय भक्ति-चेतना की कोई प्रवृत्ति, धारा और रूप अपने आरंभ से लगाकर अपने उत्कर्ष तक एकरूप और एकरैखिक कभी नहीं रहे। इन अंतःक्रियाओं के कारण इसमें प्रतिरोध, समाहार, आत्मसातीकरण, समन्वय, एकीकरण जैसी प्रक्रियाएँ चलती रहीं। भक्ति-चेतना के विकास को समझने के लिए इन अंतःक्रियाओं और इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रेरकों की पहचान और समझ बहुत ज़रूरी है। अभी तक भा

Madhav Hada
Feb 2528 min read


परंपरा की जगह कभी-कभी खूँटे ले लेते हैं
माधव हाड़ा से पीयूष पुष्पम् का संवाद पाठ। सं. देवांशु। जुलाई-सितंबर, 2024 प्रश्न: आपने शुरुआत तो आधुनिक कविता की आलोचन से की थी। अब आपने...

Madhav Hada
Aug 21, 202422 min read
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