top of page
Search


Lal Ded: A Living Tradition of Bhakti Poetry in Kashmir
Madhav Hada Translated from Hindi by Pradeep Trikha Indian Literature | Jan-Feb 2025 | Vol. 345 Lal Ded (1317-20 - 1373 AD) was a...

Madhav Hada
Jan 24, 202518 min read


कोऊ जन निंदो, कोऊ जन बंदो
मीरां के जीवन कविता की निर्मितियों का पुनरवलोकन संगना । अंक 52-55। अक्टूबर 2023 -सितंबर,2024 मीरां का प्रचारित जीवन, उसके असल जीवन से अलग...

Madhav Hada
Dec 24, 202434 min read


कोई निंदौ, कोई बिंदौ
मीराँ को जानने-समझने के दौरान के कुछ संकल्प और दुविधाएँ मीरां की कविता की एक पंक्ति है- कोई निंदौ कोई बिंदौ, मैं तो चलूंगी चाल अपूठी।...

Madhav Hada
Oct 30, 20249 min read
bottom of page
