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हिंदी आलोचना का संभ्रम और अंतर्बाधाएँ
मधुमती, जून 2019 में प्रकाशित आलोचना साहित्य के आस्वाद में भोक्ता की मदद करती है। यह साहित्य के अर्थ-आशय तक भोक्ता की पहुँच को सुगम बनाती...
माधव हाड़ा
Nov 11, 20197 min read


परंपरा में रचा-बसा आधुनिक
नामवरसिंह पर एकाग्र ' साक्षात्कार के विशेषांक में प्रकाशित नामवरजी की आलोचना नयी और अलग है, लेकिन उनके यहाँ इसके उगने–बढ़ने का खाद-पानी...
माधव हाड़ा
Oct 29, 201910 min read


प्रकृति के पड़ोस में कविता
बहुवचन, जनवरी-मार्च, 2016 में प्रकाशित मनुष्य जीवन प्रकृति की रचना है इसलिए उसको देखने-समझने में प्रकृति को देखना-समझना शामिल है। कविता भी...
माधव हाड़ा
Jun 4, 201612 min read
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